संसद में सूचना प्रबंधन (लार्डि‍स)

भारतीय संसद में सूचना प्रबंधन के संबंध में 1921 का वर्ष मील का पत्‍थर रहा है । उस समय तक भारतीय वि‍धानमंडल के सदस्‍यों के लि‍ए कोई पृथक ग्रंथालय नहीं था । प्रकाशनों का केवल एक छोटा संग्रह बिना कि‍सी उपयुक्‍त वर्गीकरण के रखा जाता था, जि‍समें मुख्‍यत: वि‍भागीय प्रति‍वेदन वि‍धानमंडलों की कार्यवाही कानून आदि‍ होते थे । सदस्‍यों द्वारा पुस्‍तकों ओर अन्‍य महत्‍वपूर्ण प्रकाशनों की मांग कि‍ए जाने पर तत्‍कालीन वि‍धायी वि‍भाग और 'इम्‍पीरि‍यल' सचि‍वालय के गंथालयों से उन्‍हें उधार लि‍या जाता था । ऐसी व्‍यवस्‍था में नि‍हि‍त कमि‍यों को काफी वर्षों से महसूस कि‍या गया और तत्‍कालीन केंद्रीय वि‍धान सभा में वर्ष 1921 में पहली बार एक छोटे पुस्‍तकालय की स्‍थापना की गयी । यह पुस्‍तकालय अनेक वर्षों तक बहुत सीमि‍त स्‍तर पर सदस्‍यों को सेवा उपलब्‍ध कराता रहा ।

वर्ष 1947 में राष्‍ट्र द्वारा स्‍वाधीनता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात और स्‍वाधीन भारत के लि‍ए नए संविधान का प्राइज़ तैयार करने के लि‍ए संवि‍धान सभा द्वारा कार्य प्रारंभ करने के बाद ग्रंथालय संबंधी मांगें कई गुना बढ़ने लगीं । नीति‍ नि‍र्धारण तथा नीति‍ के मूल्‍यांकन अथवा कि‍सी सरकारी गति‍वि‍धि‍ के आलोचनात्‍मक मूल्‍यांकन के लि‍ए सरकारी सूचना स्रोतों पर ही सदस्‍यों की अत्‍यधि‍क नि‍र्भरता को असंतोषजनक महसूस कि‍या गया । इसलि‍ए, पुस्‍तकों, वि‍धायी वाद-वि‍वादों और संसदीय पत्रों के न केवल एक भंडार के रूप में बल्‍कि‍ एक अद्यतन और वि‍षयपरक ज्ञान भंडार को उपलब्‍ध कराने के रूप में एक ऐसी स्‍वतंत्र और वि‍शाल ग्रंथालय सेवा की परि‍कल्‍पना की गयी जि‍सका सदस्‍य आश्रय ले सकें ।

वर्ष 1950 में भारत के एक प्रभुतासंपन्‍न, लोकतांत्रि‍क गणराज्‍य बनने के साथ ही संख्‍या तथा गुणात्‍मकता, दोनों दृष्‍टि‍यों से संसद ग्रथालय में संग्रहीत पुस्‍तकों में व्‍यवस्‍थि‍त वि‍स्‍तार का आरंभ हुआ । साथ ही नवगठि‍त शोध तथा संदर्भ शाखा के अंतर्गत सदस्‍यों की संदर्भ सेवा का भी गठन कि‍या गया जो प्रारंभ में संसद ग्रंथालय से पृथक कार्य करती थी ।

तब से पि‍छले पॉंच दशकों से अधि‍क समय के दौरान, ग्रंथालय तथा संसद सदस्‍यों की शोध और संदर्भ सेवाएं धीरे-धीरे वि‍कसि‍त हुई हैं, जि‍न्‍हें संसद ग्रंथालय तथा संदर्भ, शोध, प्रलेखन और सूचना सेवा के नाम से जाना जाता है और यह अपने नाम के शब्‍दों के प्रथम अक्षरों से बने शब्‍द 'लार्डि‍स' के रूप में अधि‍क जानी जाती है । एकीकृत सेवा का वर्तमान ढांचा और नाम, वर्ष 1974-75 में लोक सभा तथा राज्‍य सभा सचि‍वालयों का बड़े पैमाने पर कृत्‍यात्‍मक पुनर्गठन कि‍ए जाने के परि‍णामरूवरूप अस्‍ति‍त्‍व में आया है ।

यद्यपि‍ संसद ग्रंथालय तथा संदर्भ, शोध, प्रलेखन और सूचना सेवा (लार्डि‍स) लोक सभा सचि‍वालय के प्रशासनि‍क तंत्र का एक भाग है परंतु यह संसद के दोनों सदनों के सदस्‍यों को सेवा उपलब्‍ध कराती है और मुख्‍यत: वि‍षय-अनुभाग-एवं डेस्‍क अधि‍कारी प्रणाली के आधार पर कार्य कराती है । प्रत्‍येक स्‍तर पर उद्देश्‍य आवश्‍यक वि‍शि‍ष्‍ट जानकारी और वि‍शेषज्ञ जानकारी के वि‍कास को सुनि‍श्‍चि‍त करना है तथा व्‍यापक वि‍षय क्षेत्रों के अंतर्गत डेस्‍कों की पारंपरि‍क परि‍वर्तनशीलता तथा अनुभव की वि‍वि‍धता को बनाए रखना है ।

इस समय संसद ग्रंथालय तथा संदर्भ शोध प्रलेखन और सूचना सेवा को नि‍म्‍नलि‍खि‍त कृत्‍यात्‍मक प्रभागों में वि‍भाजि‍त कि‍या गया है ।

  • ग्रंथालय प्रभाग

  • सदस्‍य संदर्भ प्रभाग

  • मीडि‍या एवं जन संपर्क प्रभाग

  • दृश्‍य, श्रव्‍य और प्रसारण प्रभाग

  • सूचना सेवा का कंप्‍यूटरीकरण

  • संसदीय संग्रहालय और अभि‍लेखागार प्रभाग

  • संसदीय अध्‍ययन तथा प्रशि‍क्षण ब्‍यूरो (बीपीएसटी)

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