लाभ के पद से संबंधित संवैधानिक और विधिक स्थिति की जांच के लिए संयुक्त समिति

संसद की दोनों सभाओं द्वारा अंगीकृत प्रस्तावों के अनुसरण में, लाभ के पद से संबंधित संवैधानिक और विधिक स्थिति की जांच के लिए श्री इकबाल अहमद सरडगी के सभापतित्व में संयुक्त समिति का गठन किया गया है जिसके विचारार्थ विषय निम्न प्रकार होंगे-

(क) संविधान के अनुच्छेद 102 में "लाभ का पद" अभिव्यक्ति की परिनिर्धारित व्याख्या और उसमें अंतर्निहित संवैधानिक सिद्धांतों के संदर्भ में जांच करना तथा "लाभ का पद" की व्यापक परिभाषा के संबंध में सुझाव देना;

(ख) "लाभ का पद" के संबंध में सामान्य और व्यापक मानदंड का मूल्यांकन जो न्यायसंगत, उचित और युक्तियुक्त हो और सभी राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों पर प्रयुक्त किए जा सकते हों, की सिफारिश करना;

(ग) युनाईटेड किंगडम में यथाविद्यमान तथा संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा विचारित संसद सदस्यों की निरर्हता के निवारण से संबंधित विधि व्यवस्था के अंगीकरण की व्यवहार्यता की जांच करना; और

(घ) उपर्युक्त के आनुषंगिक किसी अन्य विषय की जांच करना। संयुक्त संसदीय समिति ने निर्णय लिया है कि संवैधानिक/विधिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विधि संस्थान, बार काउंसिल, सार्वजनिक निकाय या व्यक्ति जो संयुक्त संसदीय समिति के विचारार्थ उपर्युक्त मुद्दों पर ज्ञापन प्रस्तुत करने के इच्छुक हैं अंग्रेजी या हिंदी में उनकी दो प्रतियां निदेशक (समिति शाखा), लोक सभा सचिवालय, संसदीय सौध, नई दिल्ली, ई-मेलः almartin@sansad.nic.in को इस प्रकार भेजें कि वह 6 अक्तूबर, 2006 को या उससे पहले प्राप्त हो जाए। समिति को प्रस्तुत किए जाने वाले ज्ञापन समिति के अभिलेखों का हिस्सा रहेंगे और उन्हें कठोरता पूर्वक गोपनीय समझा जाए तथा किसी भी व्यक्ति को परिचालित नहीं किया जाए क्योंकि ऐसा कोई भी कृत्य समिति का विशेषाधिकार भंग माना जाएगा। जो व्यक्ति ज्ञापन प्रस्तुत करने के साथ-साथ समिति के समक्ष मौखिक साक्ष्य देने के इच्छुक हैं उनसे अनुरोध है कि समिति के विचारार्थ इस आशय की सूचना दें।

संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976

खंडों की व्यवस्था

खंड

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

2. प्रस्तावना में संशोधन

3. अनुच्छेद 31 के पश्चात् नए उप-शीर्ष का अंतःस्थापन

4. अनुच्छेद 31ग का संशोधन

5. नए अनुच्छेद 31घ का अंतःस्थापन

6. नए अनुच्छेद 32क का अंतःस्थापन

7. अनुच्छेद 39 का अंतःस्थापन

8. नए अनुच्छेद 39क का अंतःस्थापन

9. नए अनुच्छेद 43क का अंतःस्थापन

10. नए अनुच्छेद 48क का अंतःस्थापन

11. नए भाग 4क का अंतःस्थापन

12. अनुच्छेद 55 का संशोधन

13. अनुच्छेद 74 का संशोधन

14. अनुच्छेद 77 का संशोधन

15. अनुच्छेद 81 का संशोधन

16. अनुच्छेद 82 का संशोधन

17. अनुच्छेद 83 का संशोधन

18. अनुच्छेद 100 का संशोधन

19. अनुच्छेद 102 का संशोधन

20. अनुच्छेद 103 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन

21. अनुच्छेद 105 का संशोधन

22. अनुच्छेद 118 का संशोधन

23. नए अनुच्छेद 131 क का अंतःस्थापन

24. नए अनुच्छेद 139 क का अंतःस्थापन

25. नए अनुच्छेद 144 क का अंतःस्थापन

26. अनुच्छेद 145 का संशोधन

27. अनुच्छेद 150 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन

28. अनुच्छेद 166 का संशोधन

29. अनुच्छेद 170 का संशोधन

30. अनुच्छेद 172 का संशोधन

31. अनुच्छेद 189 का संशोधन

32. अनुच्छेद 191 का संशोधन

33. अनुच्छेद 192 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन

34. अनुच्छेद 194 का संशोधन

35. अनुच्छेद 208 का संशोधन

36. अनुच्छेद 217 का संशोधन

37. अनुच्छेद 225 का संशोधन

38. अनुच्छेद 226 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन

39. नए अनुच्छेद 226 क का अंतःस्थापन

40. अनुच्छेद 227 का संशोधन

41. अनुच्छेद 228 का संशोधन

42. नए अनुच्छेद 228 क का अंतःस्थापन

43. नए अनुच्छेद 257 क का अंतःस्थापन

44. अनुच्छेद 311 का संशोधन

45. अनुच्छेद 312 का संशोधन

46. नए भाग चौदह क का अंतःस्थापन

47. अनुच्छेद 330 का संशोधन

48. अनुच्छेद 352 का संशोधन

49. अनुच्छेद 353 का संशोधन

50. अनुच्छेद 356 का संशोधन

51. अनुच्छेद 357 का संशोधन

52. अनुच्छेद 358 का संशोधन

53. अनुच्छेद 359 का संशोधन

54. अनुच्छेद 366 का संशोधन

55. अनुच्छेद 368 का संशोधन

56. अनुच्छेद 371 च का संशोधन

57. सातवीं अनुसूची का संशोधन

58. अनुच्छेद 226 के अधीन लंबित याचिकाओं से संबंधित विशेष उपबंध

59. कठिनाइयों को दूर करने के संबंध में राष्ट्रपति की शक्तियां

 

संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धाराएं 19, 20, 32 और 35 लाभ के पदों के संबंध में सुसंगत है, जिन्हें नीचे उद्घृत किया गया है

19. अनुच्छेद 102 का संशोधन; संविधान के अनुच्छेद 102 में खण्ड (1) के उपखण्ड (क) के स्थान पर निम्नलिखित उप-खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा; अर्थात

"(क) यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन ऐसे लाभ के पद को धारण करता है जिसको धारण करने वाले का निरर्हित होना संसद ने विधि द्वारा घोषित किया है;"।

20. अनुच्छेद 103 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन-

संविधान के अनुच्छेद 103 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाए; अर्थातः-

निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय - (1) यदि यह प्रश्न उठता है कि संसद के किसी सदन का कोई सदस्य अनुच्छेद 102 के खण्ड (1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं, या

(ख) कोई व्यक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन संसद की किसी सभा के निर्वाचन में भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया गया है संसद के किसी सदन के, या किसी राज्य विधान मंडल के किसी सदन के सदस्य के रूप में चुने जाने और सदस्य बनने के लिए निरर्हित हो या और उसके इस प्रकार निरर्ह रहने की अवधि या निष्कासन की, या ऐसे निरर्हता की अवधि में कटौती के प्रश्न को विनिश्चय के लिए राष्ट्रपति को निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) किसी ऐसे प्रश्न पर विनिश्चय करने से पहले राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय लेगा और निर्वाचन आयोग इस प्रयोजन से ऐसी पृच्छा कर सकेगा, जो यह उचित समझे।"

32. अनुच्छेद 191 का संशोधन - संविधान के अनुच्छेद 191 में, खण्ड (1) के उपखण्ड (क) के स्थान पर निम्नलिखित उपखण्ड प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थातः-

"(क) यदि वह भारत सरकार के या पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी राज्य की सरकार के अधीन लाभ का कोई ऐसा पद धारण करता है जिसके धारक को संसद द्वारा विधि द्वारा निरर्ह घोषित किया गया है।,"।

33. अनुच्छेद 192 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन - संविधान के अनुच्छेद 192 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थातः-

192. निरर्हता से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय - यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी (क) राज्य के विधान मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य अनुच्छेद 191 के खण्ड (1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं, या

(ख) कोई व्यक्ति जो संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन राज्य विधान मंडल के किसी सदन के निर्वाचन में भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया गया है, संसद के किसी भी सदन या राज्य विधान मंडल के किसी सदन का सदस्य, या चुने गए या सदस्य बनने के लिए निरर्हित होने या उसकी ऐसी निरर्हता की अवधि या निष्कासन की या ऐसे निरर्हित होने या ऐसे निरर्हता की अवधि में कटौती के प्रश्न को विनिश्चय क लिए राष्ट्रपति को निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) किसी ऐसे प्रश्न पर विनिश्चय करने से पूर्व राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय लेगा और निर्वाचन आयोग इस प्रयोजन से ऐसी पृच्छा कर सकेगा जो वह उचित समझे।"।

 

संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978

संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 19 और 32 का लोप संविधान (44वां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 45 द्वारा किया गया और संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 20 और 33 का प्रतिस्थापन संविधान (44वां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा क्रमशः 14 और 25 द्वारा किया गया जिन्हें नीचे पुनः प्रस्तुत किया जा रहा है-

14. अनुच्छेद 103 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन- संविधान के अनुच्छेद 103 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थातः-

"103. सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय-

(1) यदि यह प्रश्न उठता है कि संसद के किसी सदन का कोई सदस्य अनुच्छेद 102 के खण्ड में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न राष्ट्रपति को विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) ऐसे किसी प्रश्न पर विनिश्चय करने से पहले राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय लेगा और ऐसी राय के अनुसार कार्य करेगा।"

25. अनुच्छेद 192 के स्थान पर एक नए अनुच्छेद का प्रतिस्थानः- संविधान के अनुच्छेद 192 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात-

"192. सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय -

(1) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन् का कोइ सदस्य अनुच्छेद 191 के खंड(1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं, तो यह प्रश्न राज्यपाल को विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) ऐसे किसी प्रश्न पर विनिश्चय करने से पहले राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय लेगा और ऐसी राय के अनुसार कार्य करेग।"

45. संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 का संशोधन -

संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 में धाराएं 18, 19, 21, 22, 31, 32, 34, 35, 58 और 59 का लोप किया जाएगा।


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